Raipur Breaking: रायपुर न्यायालय में वकील के वेशभूषा में फर्जी वकील गिरफ्तार..जानें कैसे खुली पोल…
गिरफ्तार फर्जी वकील से 4-5 व्यक्तियों का आधार कार्ड सहित आईडी कार्ड बरामद, गिरोह के 5 फरार सदस्यों की तलाश में जुटी पुलिस, पक्षकार के हंगामे के बाद खुली फर्जी वकील की पोल...

रायपुर, (The Grand Leakage News). प्रदेश की राजधानी रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में सफेद शर्ट और ब्लैक पेंट पहनकर कई व्यक्ति घूम रहे हैं, जो खुद को वकील बताकर न्यायालयीन संबंधित कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे फर्जी वकील खुद को वकील बताकर मुवक्किलों को फंसाकर असली वकीलो के हक पर डाका डालने का कार्य कर रहा है। बहराल एक ऐसा ही मामला जिला न्यायालय परिसर में आया है जो खुद को वकील बताता था और सफेद शर्ट ब्लैक पेंट पहनकर वकील के वेशभूषा में घूमता था। जिला अधिवक्ता वक्ता संघ के पदाधिकारियों द्वारा शनिवार को एक फर्जी वकील को पकड़ने का मामला सामने आया है। मनीष कुर्रे नाम का यह व्यक्ति खुद को हरीश डहरिया बताकर वकालत से जुड़े काम करता हुआ पाया गया। वहीं संदिग्ध लगने पर जब उससे दस्तावेज मांगे गए तो उसकी असली पहचान सामने आई। जांच में पता चला कि फर्जी वकील का असली नाम मनीष कुर्रे है। जो अपना नाम छुपाकर दूसरे का नाम लेकर वकील के वेशभूषा में न्यायालय परिसर में घूमता था। जो कई लोगों से खुद को वकील बताकर जमानत संबंधित कार्यों को अंजाम देता था। रायपुर जिला अधिवक्ता संघ के मुताबिक आरोपी ने अपने विजिटिंग कार्ड और व्हाट्सएप डीपी में खुद को वकील के रूप में दर्शाता था। फिलहाल फर्जी वकील को सिविल लाइन पुलिस ने गिरफ्तार कर उसके अन्य साथियों का पतासाजी करने में जुटी हुई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के संपर्क में पांच अन्य सदस्य फरार हैं जो फर्जी वकील ग्रुप का गिरोह है, पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। मामले में पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। और अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

पक्षकार के हंगामे के बाद खुली फर्जी वकील की पोल..
बताया जा रहा है कि आरोपी किसी पक्षकार का कार्य कराने के एवज में पर न्यायालय परिसर पहुंचा था, जब संबंधित पक्षकार का कार्य पूरा नहीं हो पाया, तो पीड़ित पक्षकार ने न्यायालय परिसर में ही हंगामा करना शुरू कर दिया। जिसके बाद अन्य अधिवक्ताओं की नजर फर्जी वकील पर पड़ी। वहीं फर्जी वकील के व्यवहार, और उसके बात करने की हरकतों और अन्य गतिविधियों पर संदेह होने पर वकीलों ने उससे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपी के जवाब संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद उसके कथित फर्जीवाड़े का पूरा खुलासा हो गया।

गौरतलब है कि जो राजधानी रायपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश के लगभग समस्त न्यायालयों में सिर्फ सफेद शर्ट, ब्लैक पेंट पहनकर खुद को वकील बताकर न्यायालय कार्य करते हैं और लोगों को बरगलाकर पैसे ऐंठने का कार्य करते हैं। जिला न्यायालय परिसर, तहसील, एवं राजस्व कार्यालयों में ऐसे कई संदिग्ध व्यक्ति घूमते मिल जाएंगे जिनके पास न ही अधिवक्ता संघ का कार्ड मिल पाएगा, और न ही हाई कोर्ट में रजिस्ट्रेशन का प्रमाण पत्र फिर भी खुद को वकील बताकर न्यायालय से संबंधित कार्य कर रहे हैं। आपको कई ऐसे फर्जी डिर्गीधारी और कई ऐसे फर्जी वकील रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के अलग-अलग कोर्ट में घूम रहे है। जो लोगों से पक्षकार की मदद के पैसा लेते हैं और दलाली का कार्य करते हैं। बहराल यह पूरा मामला सामने आने के बाद समस्त न्यायालयों के जिला अधिवक्ता संघों को संज्ञान लेकर इसमें कार्रवाई करनी चाहिए और ऐसे लोगों के पहचान करने के लिए उचित और ठोस कदम उठाना चाहिए।





